September 29, 2022

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चुनाव की सरगर्मी है इसलिए ओमिक्रोन की फिक्र नहीं करनी है

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दृष्टांत-1

            उत्तराखंड संग गोवा, पंजाब, हिमाचल, उत्तरप्रदेश राज्यो मे चुनाव की तारीख  का ऐलान हो चुका है  जिसके चलते चुनाव आयोग शांति पूर्ण चुनाव करने के लिए  चुनाव संबन्धित प्रशिक्षण  प्रक्रिया का आगाज कर चुकी है हर चुनावी राज्य के हर  जिले मे आयोग ईवीएम  और VVPAT से जुड़ी खास बाते समझा रही है साथ साथ चुनाव के दौरान होने वाली समस्याओ का निस्तारण अपने  माध्यम से कैसे करना है, मशीन को सील करना, मतप्रतिशत निकालना, प्रत्याशी, मतदाता और पोलिंग पार्टी के अधिकार जैसी महत्वपूर्ण जानकरिया साझा कर रहा है।

            न्यू कैंट रोड, हाथी ब्ड्कला स्थित वी0 सी0  वीर गब्बर सिंह सामुदायिक भवन, देहरादून,  मे चल रहे प्रशिक्षण  कार्यक्रम मे आज एक्सप्रेस न्यूज़ 24X7  नज़र हर खबर पर की टीम पहुंची, जहां हमे कोरोना काल मे जारी गाइडलाइन की धज्जिया उड़ती नज़र आई  कैमरे को देखते ही  हर कोई चौकन्ना हो गया  कोरोना के  बूस्टर लगवाने की अपील चालू हो गई, वही कोरोना गाइडलाइन का पालन करने के लिए निर्देश दिये जाने लगे पर अव्यवस्था के चलते  किसी के कान पर जू तक नहीं रेंगी। और हर कोई कागजी कार्यवाही के दौरान होने वाली आपा-धापी का शिकार होता नज़र आया। परिसर के बाहर एक फ़्लेक्स पर  कोरोना से बचने के  4 सूत्र लिखे गए थे पर अंदर उनही सूत्रो मे से सूत्र 2 की अनदेखी जारी थी।

            ऐसे मे एक बात ये भी उठती है की सरकार एक लंबे चयन प्रक्रिया के बाद कर्मचारियो का चयन कर के नौकरी पर रखती है । उनमे से भी अतिउत्तम कर्मचारियो का चयन चुनाव जैसे महत्वपूर्ण और ज़िम्मेदारी वाले कार्य के लिए करती है।  इन  कर्मचारियो  ने छोटे बड़े न जाने कितने मतदानो मे अपनी सेवा दी होंगी। ऐसे मे बात  उठना तय है की जब छोटे – छोटे बच्चे  ऑनलाइन क्लास मे पढ़ कर अपने उज्ज्वल भविष्य के सपने देख सकते है तो इन अनुभवी कर्मचारियो को उनके ही दफ्तर मे ऑनलाइन प्रशिक्षण  नहीं दिया जा सकता था क्या? जहां अनपढ व्यक्ति भी  पिछले ढाई साल से डिजिटल सेवाओ  का उपयोग करते करते थोड़ा बहुता  पढ़ने लिखने लग गया है ,

            छोटी- मोटी बैठक से लेकर केंद्र और राज्य  सरकार की बैठके ऑनलाइन ही संचालित की गई, इस तरह की किसी व्यवस्था का प्रयोग करके भी इन पढे लिखे समाज के कर्मचारियो को ये प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता था, यदि नहीं तो  ब्लॉक स्तर पर  इन प्रशिक्षण कार्यकर्मों को निबटाया नहीं जा सकता था क्या ? आखिर ये कर्मचारी आए भी तो अलग अलग ब्लॉक से ही है फिर इस अखाडे को जोड़ने की क्या अवश्यकता रहती,

ऐसे मे सवाल ये भी है की

  1. इन कर्मचारियो का कोरोना टेस्ट किया गया था या नहीं ?
  2. यदि किसी एक कर्मचारी को इस महामारी ने अपनी चपेट मे आज या कल मे ही लिया हो तो ऐसे मे संक्रमण होने का खतरा होगा की नहीं?
  3. यदि हाँ तो ये कोरोना को बढ़ाएगा की नहीं।
  4. यदि नहीं तो जनता से  कोरोना नियमो का पालन  कराने के लिए सक्ति क्यो?

            दृष्टांत-2

                        ये तो एक ही पहलू है दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा संचालित पासपोर्ट दफ्तर की भी यही हालत है  जो की कोरोना को  रफ्तार देने मे कोई कमी नहीं छोड़ रहा है, आमतौर पर दफ्तर के ज़्यादातर कार्य ऑनलाइन ही हो जाते है पर बात जब सत्यापन की हो तो दफ्तर की ओर से प्रार्थी को एक निश्चित दिन पर बुला कर सत्यापन प्रक्रिया को अंजाम दिया जाता है।  इस दिन प्रार्थी कार्यालय मे आकार अपने दस्तावेज़, अपनी पहचान चिन्ह आदि जांच अधिकारी को दिखा कर सत्यापन करा अपने पासपोर्ट पाने की प्रक्रिया के अगले चरण मे पहुँच जाता है, इस प्रक्रिया के दौरान ही अनियमता सामने आ रही है। जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होने के लिए प्रार्थी को कार्यालय के बाहर सुबह से पंक्ति लगानी होती है इस लिए यहा बहुत भीड़ लगी रहती है , इस पर पूर्व पासपोर्ट धारक को कोई समस्या आती है तो वह भी इसी दफ्तर मे आ कर उस समस्या के समाधान के लिए कतारबद्ध होते है।

            ऐसे मे कम स्थान मे ज्यादा लोगो का होना समस्या और महामारी को रफ्तार मे सहायक पहलू बन रहे है।

            यदि दफ्तर मे सीमित लोगो को बुलाया जाये तो समस्या का अंत हो सकता है पर न जाने क्या कारण है की ओमिक्रोन के बढ़ते मामलो के चलते सरकार, और प्रशासनिक अधिकारी  आम जनता को बचाने के लिए अपनी ओर से बढ़- चड़ कर काम कर रही है वही दूसरी ओर जिन  लोगों का इस व्यस्थाओ को लागू करने की जिम्मा मिला हुआ है वो आम जनता को ओमिक्रोन की आग मे झोंकने से बिलकुल परहेज नहीं कर रहे है।

ऐसे मे 3 एडियट मूवी का वो दृश्य याद आता है जहां एक शब्द के गलत प्रयोग से चमत्कार की पूरी परिभाषा हे बदल गई, यही हाल आज कल सामने आ भी रही है जहा कुछ एहतियात के साथ मिली छूट का लोग गलत मतलब निकाल कर पुराने ढर्रे पर चल पड़े है।

            ऐसे मे कोई कहा तक सुरक्षित रह सकता है, वो दिन याद आते है जब लोगो को अस्पताल मे जगह नहीं मिल रही थी ऑक्सिजन न मिलने के चलते न जाने कितने लोग काल के गाल मे समा गए थे। लोगो को बचाने के लिए डाक्टर, नर्स और  पुलिस ने  दिन रात एक किए और खुद अपना बलिदान दे कर अपना कर्तव्य निभाया , आज वो यदि देख सकते तो यही कहते की जिन लोगो को हमने बचाया था वो खुद आज दूसरे के लिए क्या कर रहे है इन लोगो को दूसरे लोगो को इस समस्याओ से बचाने के लिए आगे आना था वो अपनी ज़िम्मेदारी से कैसे भाग सकते है।

            इस अनदेखी  का खामियाजा हमको चुनाव के बाद न भुगतना पड़े बस यही प्रार्थना कर सकते है और आप लोगो से अपील कर सकते है की सरकार जहा तक आप के लिए कर सकती थी किया अब अपना विवेक का प्रयोग करे। आप का जीवन बहुमूल्य है इस की कीमत समझे और ज़िम्मेदारी से कोरोना गाइडलाइंस का पालन करे और औरों से भी कराये ।

“सुरक्षित रहिए सुरक्षित रखिए”

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