September 25, 2022

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कुमाऊं यूनिवर्सिटी में पाली-पोषी जा रही हैं आंत के कैंसर की कोशिकाएं, फिर करेंगे दवाओं पर शोध

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कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर में जंतु विज्ञान की प्रयोगशाला में कोलोन कैंसर कोशिका पर अध्ययन शुरू हो गया है। विवि के इतिहास में पहली बार नेशनल सेंटर फार सेल साइंस पुणे से आंत के कैंसर के मरीज की जिंदा कोशिका का प्रयोगशाला में पालन-पोषण किया जा रहा है।

कुमाऊं विवि के डीएसबी परिसर में जंतु विज्ञान की प्रयोगशाला में कोलोन कैंसर कोशिका पर अध्ययन शुरू हो गया है। विवि के इतिहास में पहली बार नेशनल सेंटर फार सेल साइंस पुणे से आंत के कैंसर के मरीज की जिंदा कोशिका का प्रयोगशाला में पालन-पोषण किया जा रहा है। इसके लिए बनी प्राध्यापकों व शोधार्थियों की टीम को जिम्मेदारी दी गई है। इस जिंदा कोशिका से आंत के कैंसर की दवा तैयार करने की दिशा में शोध अध्ययन भी आरंभ किया गया है।डीएसबी परिसर जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट की पिछले पांच साल की मेहनत के बाद हाल ही में नेशनल सेंटर फार सेल साइंस पुणे से कोशिका लाई गई है। यह रोजलिन पार्क मेमोरियल इंस्टीट्यूट (आरपीएमआइ-1640) मीडिया में पाली जा रही है। प्रो. बिष्टï के अनुसार आंत के कैंसर के मरीज की जिंदा कोशिका को लाकर जंतु विज्ञान प्रयोगशाला में उसका पालन-पोषण किया जा रहा है। यह कोशिका जिंदा रहे, इसके लिए खास तरह का सेटअप बनाया गया है। 

जिंदा कोशिका में शोध से बड़ी आंत के कैंसर की दवा की खोज में मदद मिलेगी। राज्य के पर्वतीय इलाकों में बड़े पैमाने पर जड़ी-बूटियां हैं। इनमें मौजूद रासायनिक तत्व कैंसर को मात दे सकते हैं। यदि जड़ी-बूटियों के रसायन से कोशिका मर गई तो कैंसर की दवा बनाई जाएगी। प्रो. बिष्ट के अनुसार कोशिका को जिंदा रखने के लिए सेट अप का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस, पांच प्रतिशत कार्बनडाइआक्साइड तथा 95 प्रतिशत नमी दी जा रही है। बड़ी आंत के कैंसर का मुख्य स्रोत स्मोक्ड मीट या जला हुआ मांस होता है। पर्वतीय क्षेत्रों खासकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों की आबादी इस तरह के मांस का सेवन अधिक करती है। 

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