September 29, 2022

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उत्‍तराखंड : कार्बेट टाइगर रिजर्व के बफर जोन पाखरो में टाइगर सफारी पर सीईसी सख्त, मांगा ब्योरा

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 कार्बेट टाइगर रिजर्व के बफर जोन पाखरो में टाइगर सफारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने सख्त रुख अपनाया है। कमेटी ने शुक्रवार को दिल्ली में हुई बैठक में उत्तराखंड वन विभाग के अधिकारियों से टाइगर सफारी के लिए वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति के साथ ही कई बिंदुओं पर जानकारी ली।

कमेटी ने कार्बेट टाइगर रिजर्व के रेंज से लेकर निदेशक स्तर तक के अधिकारियों टू-डायरी भी मांगी है। साथ ही यह भी पूछा कि इस टाइगर सफारी को प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट किसने बताया। यही नहीं, बाघों के वासस्थल में इस तरह की अनुमति देने के औचित्य पर प्रश्नचिह्न लगाया है।

विभागीय जांच में भी बात सामने आई इस क्षेत्र में हुए निर्माण कार्यों को वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति नहीं ली गई। इस मामले में शासन ने हाल में दो आइएफएस को निलंबित कर दिया था, जबकि कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक को वन मुख्यालय से संबद्ध किया।

कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट की सीईसी ने भी इस क्षेत्र का निरीक्षण किया। शुक्रवार को सीईसी ने दिल्ली में बैठक बुलाई, जिसमें राज्य के प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डा पराग मधुकर धकाते समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डा धकाते के अनुसार कमेटी ने टाइगर सफारी की स्वीकृति, वन भूमि हस्तांतरण, बजट समेत तमाम बिंदुओं पर जानकारी ली। साथ ही सफारी के लिए बाघ पकडऩे को पांच करोड़ की राशि रखने को अनुचित बताया। कमेटी ने पाखरो क्षेत्र के रेंज अधिकारी, डीएफओ, एसडीओ व निदेशक स्तर तक की टू-डायरी भी मांगी है। यह वह डायरी होती है, जिसमें प्रत्येक अधिकारी हर माह अपनी निरीक्षण आख्या समेत कार्यों का ब्योरा मुख्यालय को देता है।

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