September 29, 2022

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Uttarakhand Election 2022: किसकी बनेगी सरकार, बस एक दिन का इंतजार

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हर विधानसभा चुनाव में सत्ता में बदलाव का मिथक टूटेगा या इस बार भी मतदाता इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा, अब बस 24 घंटे बाद ईवीएम खुलते ही तस्वीर साफ होने लगेगी। उत्तराखंड की सभी 70 विधानसभा सीटों के लिए गुरुवार को मतगणना होगी। दोपहर तक काफी कुछ परिदृश्य स्पष्ट हो जाएगा कि मैदान में उतरे 632 प्रत्याशियों में से किन 70 की किस्मत चमकने जा रही है। उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद पांचवें विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मध्य कांटे का मुकाबला है। जिस तरह विभिन्न समाचार चैनलों और एजेंसियों के एक्जिट पोल में भाजपा और कांग्रेस, दोनों की ही सरकार बनने का अनुमान लगाया गया है, उससे भी कुछ इसी तरह के संकेत मिलते हैं। 40 से 45 सीटों पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं, जबकि 25 से 30 सीटों पर बसपा, सपा, आम आदमी पार्टी और निर्दलीय मुकाबले का तीसरा कोण बन सकते हैं।

भाजपा और कांग्रेस ने मतगणना की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। भाजपा की बात करें तो मंगलवार को प्रांतीय पदाधिकारी दिनभर इसमें जुटे रहे। गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में वार रूम के अलावा जिलों में कंट्रोल रूम सक्रिय रहेंगे। जिलों में समन्वयक नियुक्त किए गए हैं। बुधवार को मतगणना अभिकत्र्ताओं के साथ वर्चुअल संवाद होगा। मतगणना पर नजर रखने को केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम बुधवार को दून पहुंच रहे हैं। राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पहले ही दून पहुंच चुके हैं। उधर, कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से नामित नए पर्यवेक्षक सांसद दीपेंद्र हुड्डा, प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव ने मंगलवार को देहरादून पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल समेत कई नेताओं के साथ मतगणना की तैयारी और संभावित चुनाव परिणाम को लेकर रणनीति पर मंथन किया।

इस बार भाजपा और कांग्रेस के साथ ही राज्य में पहली बार चुनाव में उतरी आम आदमी पार्टी ने सभी 70 सीटों पर दावेदारी ठोकी है। उत्तराखंड में सभी 70 सीटों पर एक साथ गत 14 फरवरी को मतदान हुआ था। इस बार भी वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के लगभग बराबर ही मतदाताओं ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। वर्ष 2017 में मतदान प्रतिशत 65.56 रहा था, जबकि इस बार यह आंकड़ा 65.37 तक पहुंचा। यद्यपि अभी इसमें पोस्टल बैलेट का आंकड़ा जुड़ेगा तो मतदान प्रतिशत में कुछ बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। यानी, मतदान प्रतिशत के आधार पर चुनाव परिणाम का आकलन करने वालों के लिए यह काम इस बार कतई आसान नहीं।

जो राजनीतिक परिदृश्य बना है उससे लगता है कि इस बार ऐसी सीटें पहले की अपेक्षा अधिक हो सकती हैं, जहां नजदीकी मुकाबला देखने को मिलेगा। वर्ष 2017 के चुनाव में एक-तिहाई से अधिक, 26 सीटों पर इसी तरह का कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। तब 15 सीटों पर पांच हजार से कम, छह सीटों पर दो हजार से कम व पांच सीटों पर हार-जीत का फैसला एक हजार से भी कम मतों के अंतर से हुआ था। इस स्थिति में इस बार हार-जीत का कम अंतर परिणाम में उलटफेर भी कर सकता है।

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