October 6, 2022

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उत्‍तराखंड में बागियों पर भी डोरे डाल सकते हैं भाजपा और कांग्रेस

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विधानसभा चुनाव के नतीजे क्या रहते हैं, इसे लेकर 10 मार्च को तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा व कांग्रेस, दोनों की नजर बागियों पर भी है। अगर किसी सीट पर किसी पार्टी का कोई बागी चुनाव जीतता है तो तब की परिस्थितियों के मद्देनजर संबंधित पार्टी उसके लिए रेड कार्पेट बिछा सकती है। यद्यपि, दोनों ही दल बागियों को पहले ही बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं, लेकिन मन के कोने में उनके लिए कहीं न कहीं जगह भी रखी गई है। यानी, बहुमत जुटाने के लिए आवश्यकता पड़ी तो दोनों ही दल सबसे पहले अपने रूठों का साथ लेने का प्रयास करेंगे।

कोरोना संकट और चुनाव आयोग की बंदिशों के बीच बदली परिस्थितियों में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान इस मर्तबा मतदाताओं ने पूरी तरह खामोशी ओढ़े रखी। ऐसे में राजनीतिक दल अथवा राजनीतिक विश्लेषक यह अनुमान नहीं लगा पाए कि हवा का रुख किस तरफ है। ये बात अलग है कि 14 फरवरी को मतदान होने के बाद आए इसके अधिकृत आंकड़ों का विश्लेषण कर सभी दल और प्रत्याशी अपने-अपने हिसाब से इनकी व्याख्या कर रहे हैं।

इसके साथ ही उस बिंदु पर भी गहनता से विचार किया जा रहा है कि यदि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो आगे की रणनीति क्या रहेगी। इसके लिए दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस माथापच्ची में जुटे हैं। इस क्रम में उन्हें अपने बागियों का ध्यान भी आया है। बागियों के दृष्टिकोण से देखें तो विभिन्न सीटों पर भाजपा के 13 और कांग्रेस के 10 नेता बगावत कर चुनाव मैदान में डटे हैं। इनमें से कुछेक ऐसे हैं, जो अपनी-अपनी सीटों पर उलटफेर कर सकते हैं।

यह सही है कि अधिकृत प्रत्याशियों के विरुद्ध चुनाव लड़ने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के आरोप में भाजपा व कांग्रेस अपने-अपने दलों के बागियों को पार्टी से निष्कासित कर चुके हैं। बावजूद इसके, आने वाले दिनों में जरूरत पड़ने पर राजनीतिक समीकरण साधने के लिए बागियों को विश्वास में लेने की कवायद में जुटने की रणनीति भी दोनों दलों ने बनाई है। इसके तहत पहले अपने-अपने दलों के चुनाव जीते बागियों पर डोरे डाले जाएंगे और फिर दूसरों पर। देखने वाली बात होगी कि 10 मार्च को किसके पक्ष में जनादेश आता है और राजनीतिक दल अपने समीकरण बिठाने को क्या-क्या चाल चलते हैं, इस पर भी सबकी नजर है।

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