September 29, 2022

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चाहे पड़े उच्च न्यायालय की मार, उत्तराखंड काँग्रेस के प्रबल दावेदार है “राजकुमार”

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उत्तराखंड राज्य का निर्माण  हुआ तो था पहाड़ के विकास के लिए जहा इसको पर्यटन से अच्छी कमाई हो, पहाड़ी मूल की जनता को पहाड़ मे ही रोजगार, शिक्षा और स्वस्थ्य सेवा मिले स्वछ वातावरण और निर्मल जल को बचा सके, 

            जिसके लिए कई माताओ बहनो ने मुजफ्फरनगर मे सपा राज मे कई प्रकार के ज़ख़म अपने दामन मे समेटे है, बे आबरू होकर भी अपने पहाड़ और अपनी संस्कृति के लिए अपना सर्वस्व नियोछावर कर दिया , वही उत्तराखंड की नारी शक्ति आज तक अपना हक़ उत्तराखंड सरकार से नहीं पा सकी उत्तराखंड प्रदर्शंकारी  स्वतंत्र सेनानी का दर्जा पाने के लिए डीएम दफ्तर के पीछे आज तक धरने पर बैठे हुए है।   

            आज उनको न जाने कैसे नींद आएगी जब उनको पता चलेगा की जिस उत्तराखंड के लिए उन्होने बड़े बड़े बलिदान दिये वही उत्तराखंड आज घोटालो, बलात्कार,  भू-माफियाओ और ठगो  के जुर्म से कराह रहा है हर 5 साल बाद एक नई रोशनी की किरण  होती है जिसमे उत्तराखंड को नई पहचान देने की बात कही जाती है और जन समर्थन से नई सरकार का गठन होता है इस सरकार को बनाने के लिए प्रदेश भर से 70 विधायक जनता के माध्यम से चुने जाते है जिन पर अपने क्षेत्र के विकास की ज़िम्मेदारी होती है, आप ने भी कई बार इन विधायको को सुना होगा जो विकास की गंगा बहाने की बात करते है पर वास्तव मे आपकी गली की गंदी नाली तक साफ कराने तक मे पसीने आ जाते है।

            आखिर विधायक का क्या काम है ये हम सब जानते है पर विधायक जैसे गरिमामय पद को  हथियाने के किए किस- किस हद तक जाकर जनता का हक मारते है और पूरे प्रदेश का नाम धूमिल करते है।

            देहरादून जिले मे एक पूर्व विधायक जी आज कल चर्चा मे है और अपनी पहचान का माखोल उड़वाते दिख रहे है जिस पहचान के चलते लोग उनको वोट देते थे। आज उसी पहचान के चलते नपते नज़र आ रहे है। बात है 20 राजपुर विधानसभा सीट की जहा एक जाने माने नेता जी का दफ्तर है ,  उस दफ्तर मे न जाने कितने घोटालो की रूपरेखा तय हुई होगी, बात जानेंगे विस्तार से ,

             विधायक जी को आजकल जहा विधायक पद के चुनाव मे व्यस्त होना चाहिए था पर उनकी जान हाइ कोर्ट मे पड़े एक मुकदमे मे फस गई है  ,  मुकदमा भी ऐसा की जिससे बाहर आने तक चुनाव समर समाप्त हो चुका होगा और अगर मुकदमे मे हार जाते है तो अपने साथ साथ बेटे की राजनैतिक कैरियर भी समाप्त हुआ समझो।

            ये है मुद्दा  विधायक जी ने जिन प्रमाण पत्रो के माध्यम से पूर्व मे चुनाव लड़ कर विधायकी जीती थी आज वही दस्तावेज़ संदेह दे घेरे मे आ गए है,  पूर्व विधायक राजकुमार ने 2011 मे जिन दस्तावेजो के आधार पर अपना जाति प्रमाण पत्र बनवाया था ,शिकायतकर्ता खुड़बुड़ा मोहल्ला निवासी बालेश बवानिया के द्वारा आरोप लगाया की ये जाति प्रमाण पत्र फर्जी दस्तावेजो के आधार पर  बनवाया गया है  जिसके आधार पर चुनाव जीता गया है, इस पर जांच हुई और 2012 मे  आरोप सही पाया गया और प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया  , उसके बाद अपनी राजनैतिक पहचान और प्रशासन की मिली भगत से साहब ने पुन: एक नया जाति प्रमाण पत्र प्राप्त किया ,

             शिकायतकर्ता बालेश बवानिया की माने तो विधायक पर पूर्व मे ही कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए थी,  पर अपने ऊपर होने वाली कार्यवाही को वो अपने राजनैतिक पकड़ के चलते प्रभावित करते रहे,  शिकायत कर्ता ने पुन: डी0एम0  ऑफिस मे दस्तावेजो की जांच करने की अपील की जिसकी जांच चल रही है वही  शिकायतकर्ता बालेश बवानिया का कहना है की कानूनन यदि आप के दस्तावेज़  फर्जी पाये जाते है तो आप पर धोखा  धड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाता है, परंतु 10 वर्षो मे आज तक कोई नहीं चेता जिसके चलते  कार्यवाही नहीं हुई।   फिलहाल शिकायतकर्ता बालेश बवानिया ने नैनीताल  उच्च न्यायालय मे शिकायत दे कर  उक्त मसले मे 17-01-2022  मे मुक़द्दमा लिखा दिया, है  जिस पर 21-01-2022  को  उच्च न्यायालय ने केस संख्या UKHC01-000860-2022 के तहत 18 फरवरी 2022 को  राज्य सरकार,  जिला अधिकारी , उप – जिला अधिकारी (सदर), तहसीलदार, और विधायक राजकुमार को तलब किया है,  परंतु तब तक उत्तराखंड मे चुनाव समाप्त हुये 3 दिन गुज़र चुके होंगे।

                पूर्व विधायक राजकुमार पर काँग्रेस पार्टी भी दाव खेलने को तैयार है ,  देखना ये है की पार्टी इस घटनाक्रम के चलते क्या फैसला लेती है। अपनी रैली मे आप पार्टी के संस्थापक केजरीवाल पहले से ही काँग्रेस पार्टी पर प्रदेश मे अपना अस्तित्व ख़तम करने का ब्यान दे चुके है इस पर पार्टी का फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है क्यूकी यह  फैसला  प्रदेश मे पार्टी और राजनीति के नए  समीकरण तय करेगा।

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