October 6, 2022

ExpressNews24x7

Leading News Channel Expressnews24x7

पुत्रदा एकादशी

Spread the love

भारतीय संस्कृति मे हर दिन का कोई न कोई महत्व है आज की आधुनिकता के आगे भले ही हम हर चीज़ के पहले वैज्ञानिकता को देखते है पर ये भूल जाते है की भारतीय संस्कृति पूरी की पूरी  वैज्ञानिक तथ्यो पर आधारित है  हमे पूरी जानकारी नहीं होती जिस कारण हम अपनी भारतीय संस्कृति को रूदवादी, पिछड़ी, दाखियानूस विचारधारा कह कर अपने आप को आधुनिक दिखने की कोशिश करते  है।

            हमारे वैज्ञानिक आज भी कई ऐसी पहेलियों को अब तक सुलझाने मे असफल रहे है और उन  पहेलियों के जवाब के लिए उनही वेदो, ग्रंथो, उपनिषदों और महाकाव्यों की ओर झांक रहे है जिनमे वो रहस्य छिपे पड़े है जिनको हम आजसे दसयों साल बाद भी नहीं समझ पाएंगे। ऐसे अद्भुत रहस्यो को अपने आप मे समेटे हुये है भारतीय संस्कृति, वो तो अताताइयों ने नालंदा को ना जलाया होता तो आज भारत विश्व गुरु बनने का सपना देख रहा है वो कब का साकार हो गया होता। और ऐसा विश्व होता जहां न रंग भेद, नस्ल भेद, ऊंच-नीच, अमीर- गरीब की  जंग होती ना दमन बस भाईचारा, सुख- संपत्ति, निर्मल हृदय, उच्च मानसिकता और उत्तम स्वास्थ वाले हृष्ट-पुष्ट तेजस्वी मानव  , मानव जाती की सेवा मे सदैव तत्पर रहते।  यानि की वसुधैव कुटुम्बकम् का स्वप्न साकार हो गया होता।

            ऐसी  महान भारतीय संस्कृति मे  विशेष स्थान रखने वाली पौष शुक्ल एकादशी  (पुत्रदा एकादशी) 13 जनवरी 2022 को पड़ने वाली  है।ऐसा मानना है की इस व्रत के करने से  निसंतान दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है (पुत्रदा एकादशी का व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए नहीं अपितु संतान प्राप्ति के लिए है अतः इसको इसी आशय से देखना और समझना चाहिए )

आइये जानते है इस पुत्रदा एकादशी व्रत करने की विधि, मुहूर्त , उपयोगी मंत्र  तथा  कथा का माहात्म्य….

व्रत विधि

  • दशमी के दिन अर्थात पुत्रदा एकादशी से एक दिन पहले भक्त को सूर्यास्त के बाद भोजन नहीं करना है
  • पुत्रदा एकादशी के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर दैनिक कार्य से निवृत्त हो जाना चाहिए। 
  • नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करना चाहिए। उसके बाद साफ-सुथरा कपड़ा पहनना चाहिए।
  • भगवान विष्‍णु का ध्यान करने से पहले गणेश जी की पुजा करे फिर भगवान शिव का मनन एवं स्तुती करने के बाद भगवान  विष्णु और माता लक्ष्मी  की फोटो के सामने दीप जलाकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए  क्योकि भगवान विष्णु,भगवान शिव को अपना आराध्य मानते है और उनकी स्तुति करते है  ।
  • संकल्प के बाद कलश की स्थापना करनी चाहिए। उसके बाद कलश को लाल वस्त्र से बांधकर उसकी पूजा करें।
  • भगवान लक्ष्मी नारायण की प्रतिमा रखकर उसे जल से स्नान कराकर शुद्ध करना चाहिए।
  • धूप और दीप जलाकर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए।और भगवान शिव का मनन करना भूले (चाहे तो  मंदिर जा कर शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करे )
  • भगवान विष्णु को फल, फूल, नारियल, पान, सुपारी, लौंग, बेर, आंवला आदि अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भगवान विष्णु जी की आरती करें।
  • पूजा और आरती के बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंद की मदद करना चाहिए। 
  • इस दिन व्रत रखकर संध्या समय में कथा आदि सुनने के पश्चात फलाहार किया जाता है और एकादशी की रात में भगवान को कीर्तन करना चाहिए।  
  • एकादशी के अगले दिन समर्थानुसार ब्राह्मणों को भोजन तथा दान-दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए।

शुभ मुहूर्त

2 जनवरी को शाम में 04 बजकर 49 मिनट पर पौष पुत्रदा एकादशी शुरू होकर 13 जनवरी को शाम में 7 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी.व्रती भक्त दिन में किसी समय भगवान श्रीहरि और माता लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं.

मंत्रो प्रयोग

  • ॐ क्लीं देवकी सुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते,देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहम शरणम् गता.
  •  ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
  • वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी.

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी..

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम.

यः पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता..

  • शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं

विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्.

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्

वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

  • विष्णु जी के बीज मंत्र

ॐ बृं बृहस्पतये नम:.

ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:.

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:.

ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:.

ॐ गुं गुरवे नम:.

  • या रक्ताम्बुजवासिनी विलासिनी चण्डांशु तेजस्विनी.

या रक्ता रुधिराम्बरा हरिसखी या श्री मनोल्हादिनी॥

या रत्नाकरमन्थनात्प्रगटिता विष्णोस्वया गेहिनी.

सा मां पातु मनोरमा भगवती लक्ष्मीश्च पद्मावती॥

पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

युधिष्ठिर बोले: श्रीकृष्ण ! कृपा करके मास के शुक्लपक्ष की एकादशी का माहात्म्य बतलाइये । उसका नाम क्या है? उसे करने की विधि क्या है ? उसमें किस देवता का पूजन किया जाता है ?

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा: राजन्! पौष मास के शुक्लपक्ष की जो एकादशी है, उसका नाम ‘पुत्रदा’ है।

‘पुत्रदा एकादशी’ को नाम-मंत्रों का उच्चारण करके फलों के द्वारा श्रीहरि विष्णु का पूजन करे । नारियल के फल, सुपारी, बिजौरा नींबू, जमीरा नींबू, अनार, सुन्दर आँवला, लौंग, बेर तथा विशेषत: आम के फलों से देवदेवेश्वर श्रीहरि की पूजा करनी चाहिए । इसी प्रकार धूप दीप से भी भगवान की अर्चना करे ।

पुत्रदा एकादशी” को विशेष रुप से दीप दान करने का विधान है । रात को वैष्णव पुरुषों के साथ जागरण करना चाहिए । जागरण करनेवाले को जिस फल की प्राप्ति होति है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने से भी नहीं मिलता । यह सब पापों को हरनेवाली उत्तम तिथि है ।

चराचर जगतसहित समस्त त्रिलोकी में इससे बढ़कर दूसरी कोई तिथि नहीं है । समस्त कामनाओं तथा सिद्धियों के दाता भगवान नारायण इस तिथि के अधिदेवता हैं ।

पूर्वकाल की बात है, भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चम्पा था। राजा को बहुत समय तक कोई वंशधर पुत्र नहीं प्राप्त हुआ । इसलिए दोनों पति पत्नी सदा चिन्ता और शोक में डूबे रहते थे।

राजा के पितर उनके दिये हुए जल को शोकोच्छ्वास से गरम करके पीते थे । ‘राजा के बाद और कोई ऐसा नहीं दिखायी देता, जो हम लोगों का तर्पण करेगा’ यह सोच सोचकर पितर दु:खी रहते थे।

एक दिन राजा घोड़े पर सवार हो गहन वन में चले गये। पुरोहित आदि किसी को भी इस बात का पता न था। मृग और पक्षियों से सेवित उस सघन कानन  (घना वन) में राजा भ्रमण करने लगे। मार्ग में कहीं सियार की बोली सुनायी पड़ती थी तो कहीं उल्लुओं की। जहाँ तहाँ भालू और मृग दृष्टिगोचर हो रहे थे।

            इस प्रकार घूम घूमकर राजा वन की शोभा देख रहे थे, इतने में दोपहर हो गयी। राजा को भूख और प्यास सताने लगी। वे जल की खोज में इधर उधर भटकने लगे। किसी पुण्य के प्रभाव से उन्हें एक उत्तम सरोवर दिखायी दिया, जिसके समीप मुनियों के बहुत से आश्रम थे। शोभाशाली नरेश ने उन आश्रमों की ओर देखा। उस समय शुभ की सूचना देनेवाले शकुन होने लगे । राजा का दाहिना नेत्र और दाहिना हाथ फड़कने लगा, जो उत्तम फल की सूचना दे रहा था । सरोवर के तट पर बहुत से मुनि वेदपाठ कर रहे थे । उन्हें देखकर राजा को बड़ा हर्ष हुआ।

वे घोड़े से उतरकर मुनियों के सामने खड़े हो गये और पृथक् पृथक् उन सबकी वन्दना करने लगे । वे मुनि उत्तम व्रत का पालन करनेवाले थे । जब राजा ने हाथ जोड़कर बारंबार दण्डवत् किया,

तब मुनि बोले : ‘राजन् ! हम लोग तुम पर प्रसन्न हैं।’

राजा बोले: आप लोग कौन हैं ? आपके नाम क्या हैं तथा आप लोग किसलिए यहाँ एकत्रित हुए हैं? कृपया यह सब बताइये ।

मुनि बोले: राजन् ! हम लोग विश्वेदेव हैं । यहाँ स्नान के लिए आये हैं । माघ मास निकट आया है । आज से पाँचवें दिन माघ का स्नान आरम्भ हो जायेगा । आज ही ‘पुत्रदा’ नाम की एकादशी है, जो व्रत करनेवाले मनुष्यों को पुत्र देती है ।

राजा ने कहा: विश्वेदेवगण ! यदि आप लोग प्रसन्न हैं तो मुझे पुत्र दीजिये।

मुनि बोले: राजन्! आज ‘पुत्रदा’ नाम की एकादशी है। इसका व्रत बहुत विख्यात है। तुम आज इस उत्तम व्रत का पालन करो । महाराज! भगवान केशव के प्रसाद से तुम्हें पुत्र अवश्य प्राप्त होगा ।

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं: युधिष्ठिर ! इस प्रकार उन मुनियों के कहने से राजा ने उक्त उत्तम व्रत का पालन किया । महर्षियों के उपदेश के अनुसार विधिपूर्वक ‘पुत्रदा एकादशी’ का अनुष्ठान किया । फिर द्वादशी को पारण करके मुनियों के चरणों में बारंबार मस्तक झुकाकर राजा अपने घर आये । तदनन्तर रानी ने गर्भधारण किया । प्रसवकाल आने पर पुण्यकर्मा राजा को तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ, जिसने अपने गुणों से पिता को संतुष्ट कर दिया । वह प्रजा का पालक हुआ ।

इसलिए राजन्! ‘पुत्रदा’ का उत्तम व्रत अवश्य करना चाहिए । मैंने लोगों के हित के लिए तुम्हारे सामने इसका वर्णन किया है। जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर ‘पुत्रदा एकादशी’ का व्रत करते हैं, वे इस लोक में पुत्र पाकर मृत्यु के पश्चात् स्वर्गगामी होते हैं। इस माहात्म्य को पढ़ने और सुनने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है ।

* इस कथा को उपलब्ध संसाधनो का सज्ञान ले कर आप तक पहुचाया जा रहा है इसलिए हम इसकी उपयोगिता का कोई जिम्मा नहीं ले सकते अतः अपने   स्तर पर एक बार इसकी पुष्टि अवश्य कर ले।

* पुत्रदा एकादशी का व्रत पुत्र प्राप्ति के लिए नहीं अपितु संतान प्राप्ति के लिए है अतः इसको इसी आशय से देखा और समझना चाहिए

* प्रस्तुत कथा विभिन्न क्षेत्रों मे भिन्न- भिन्न हो सकती है।

*एक्सप्रेस न्यूज़ बालक एवं बालिका मे कोई  फरक नहीं समझता और बालिका  उत्थान का समर्थक है।

जनवरी 2022 माह पड़ने वाले अन्य व्रत एवं त्योहार

13 जनवरीपौष पुत्रदा एकादशी, लोढ़ी
14 जनवरीपोंगल, उत्तरायण, मकर संक्रांति
15 जनवरीप्रदोष व्रत (शुक्ल)
17 जनवरीपौष पूर्णिमा व्रत
21 जनवरीसंकष्टी चतुर्थी
28 जनवरीषटतिला एकादशी
30 जनवरीमासिक शिवरात्रि

About Post Author


Spread the love